Friday, August 14, 2015
Thursday, August 13, 2015
जिंदगी में पीछे मुड़कर देखने वाले कभी आगे नहीं जाते, मैने कभी पीछे मुड़कर
नहीं देखा बस चलता ही गया। देश के जाने- माने ‘समय’ हिंदी समाचार चैनल के राष्ट्रीय संपादक मनोज
मनु से भेटर्वाता लेबर निगरानी के मुख्य उप-संपादक आशीष कुमार शुक्ला से बातचीत के
संपादित अंश.....
1 आपने अपनी शिक्षा कहां से प्राप्त की?
उत्तर- मैंने जीवाजी विश्वविद्यालय
ग्वालियर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की, मैने बायलोजी से वीएसी की उपाधि पाप्त
की । मैने पत्रकारिता के क्षेत्र मे कोई पढ़ाई नही की।
2 मीडिया मे आपके करियर की शुरुआत कैसे हुई?। यह एक संयोग था या आपने इस क्षेत्र में ही करियर
बनाने का
फैसला किया था?
उत्तर- इसकी शुरूआत अखबार से हुई, कार्टूनिस्ट के तौर पर मैने मीडिया करियर की
शुरूआत की। कफी दिनों तक अख़बार मे काम करने के बाद मैं इलेक्टॉनिक मीडिया से
जुडा। जब मै बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र था तभी से किसी न किसी माध्यम से मीडिया से
जुडा रहा। मीडिया से जुडकर समाज को मै बहुत करीब से देख सकता हूं। यह संयोग मात्र
नहीं था मैने पहले से मीडिया में आने का फैसला कर रखा था।
3 आपको पत्रकारिता में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? अपनी संघर्ष यात्रा के बारे में बताए?
उत्तर- मैने जीवन में कभी संघर्ष नहीं किया और मुझे किसी भी परेशानियों का
सामना बिल्कुल नहीं करना पड़ा। परन्तु मै अपने
कार्य के प्रति हमेशा सचेत रहा। और हर कार्य को सूसंगठित ढ़ग से करना मेरी आदत रही
है। कभी मैने पीछे मुड़कर नही देखा बस करता गया शायद किसमत नें भी मेंरा भरपूर साथ
दिया।
4 आप रिपोर्टिंग और एंकरिंग मे किसे बेहतर मानते हैं और
क्यों?
उत्तर- दोनो माध्यमों का अपना-अपना महत्व है, पर रिपोर्टर
अगर एंकर बनता है, तो उसके पास ज्यादा
अनुभव होता है, जिससे उसे विशेष फायदें मिलते हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि, सबसे पहले
एक पत्रकार बनना चाहिए इससे हम विशेष लाभ पाप्त कर सकते हैं।
5 प्रिंट और इलेंक्ट्रॉनिक में कौन सा माध्यम उपयुक्त है और
क्यों?
उत्तर- दोनों माध्यमों का विशेष महत्व है, इनकी अपनी- अपनी
पहचान है। प्रिंट मीडिया में हमे अखबार के माध्यम से दिन में घटित-घटनाओं का विवरण
प्रस्तुत करते हैं, वही इलेक्टॉंनिक मीडिया घटना के घटित होने के कुछ चन्द मिनटों
मे ही चैनल के माध्यम से खबरों को प्रसारित कर देता है। यह समय की बचत करता है इसे
एक सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है, यह जनसंचार का बेहतर माध्यम है।
6 पत्रकारिता मे आपके प्रेरणा स्रोत कौन हैं। और आपकी कामयाबी का राज क्या है?
उत्तर- मेरे प्रेरणा स्रोत कोई नहीं हैं, मैंने खुद अपने बलबूते पर अपनी पहचान
मीडिया में स्थापित की है। मैने जो किया खुद किया किसी पर निर्भर रहना मेरी आदत
नहीं है। आज जो कुछ हूं सिर्फ अपनी खुद की
मेहनत की बदौलत हूँ।
7 क्या आज का मीडिया बाजारवाद की दौड में अपने तय नैंतिक सिद्धांतों को भूल
चुका है?
उत्तर- मीडिया पर बाजारवाद का दबाव होता है। मीडिया अपने कार्य को करना बाखूबी
जानता है। क्या करना है क्या यह नही यह इसे भली-भॉंति पता है। मीडिया के लिए विज्ञापन
का होना बहुत जरुरी होता है। ऐसा नही है कि, अपने सिद्धांतो को भूल चुका है, आज भी
यह एक वाच डॉग की तरह अपने कार्य को कर रहा है।
8 चौथे स्तंभ के रुप में प्रतिष्ठित हमारा मीडिया क्या अपने पेशे के साथ न्याय
कर पा रहा है?
उत्तर- यह एक संक्रमण काल है। युक्ति
में, समाज में, देश में, राजनीति में, नेताओ में, परिस्थिति में, मंथन चल रहा है।
जिसमे से विष भी निकलेगा और अमृत भी। मीडिया देश मे चल रही घटना का विवरण पेश करती
है, कुछ कारणों के चलते यह सत-प्रतिशत न्याय नहीं कर पा रही। यह संक्रमण काल है
कोई भी
अपने मार्ग से वंछित हो सकता है।
9 टीवी माध्यम में नाटकीयता बहुत बढ़ गई है, इसपर आपका क्या
विचार है?
उत्तर- लोग जो देखना चाहते हैं, हम वही दिखाते हैं। नाटकीयता बढ़ी जरुर है, पर इसका कई तरह से उपयोग
किया जा सकता है। आज जिस तरह अच्छे- अच्छे प्रोग्राम चैनलों पर दिखाये जाते हैं
इसका मकसद लोगो को जागरुक करने का है। प्रोग्राम के माध्यम से लोगों तक बहुत सारी
जानकारी पहुचाई जाती है, हम नाटक के माध्यम से सच्चाई को दिखा सकते हैं। यही कारणा
है कि, चैनलों पर नाटकीयता को
काफी महत्व दिया जा रहा है।
10 मीडिया मे कुछ चुनिंदा को फॉले-अप दिखाया जाता है ऐसा क्यों?
उत्तर- जो दिखता है, वही बिकता है, जिस चीज को जन्ता देखना चाहती है, वही हम
दिखाते हैं। जैसे नरेंद्र मोदी की रैली में ज्यादा भीड़ होती है, और राहुल में कम।
यही कारण है कि, नरेद्र मोदी को ज्यादा
फॉलो किया जा रहा है। बिना टीआरपी के चैंनल को नही चलाया जा सकता, बिना नम्बर्स के
कुछ नहीं होता। चैनल जो दिखाता है सोच समझ
कर दिखाता है। ज्यादा लोग जिस चीज को देखना पसंद करते हैं, चैंनल वही दिखाता है।
औऱ उसे इसी आधार पर टीआरपी मिलती है। मीडिया की पूरी टीम इसी पर आधारित है।
11 पत्रकारिता के क्षेत्र मे कदम रखने वाले विद्यार्थीयों को आप क्या संदेश
देना चाहेंगे?
उत्तर- लगे रहो मुन्ना भाई रास्ता कठिन है पर मंजिल को पाया जा सकता है।
लगातार अपने काम के प्रति सचेत रहें। आज कॉम्पटीशन
बहुत बढ़ गया है। आपनी पहचान बनाने के लिए खुद अपना इतिहास लिखना होता है। मन का
मनोबल ऊपर रखें अगर आप अच्छा कर रहे हैं, तो आपको उसका फल अवश्य मिलेगा। जितना
ज्यादा प्रेक्टिकल कर लोगों उतना ज्यादा अनुभव प्राप्त होगा, इसलिए पढ़ाई के साथ–
साथ जितना हो सके इस कार्य से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दें टैंलेट की कदर हर जगह है।
अगर ऐसा करने में आप संक्षम हैं तो अवश्य ही बहुत आगे तक जाएगें।
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